Saturday, June 22, 2013


इस भयवाह त्रासदी के समय किसी तरह की राजनिति नही होनी चाहिए एंव नेताओ और बद्विजीवीयो को मीडिया के सामने अनाप-ंउचयसनाप बयान बाजी नही करनी चाहिए , जिससे जनता का गुस्सा और भड़के इस विपत्ति के समय पूरे प्रदेष को और देष को हम सभी के साथ निस्वार्थ भाव से खड़ा होना चाहिए। जिससे राहत कार्यो पर तेजी लायी जा सके , और नेताओं को भी वहाॅं पर ज्यादा भ्रमण नही करना चाहिए भ्रमण के चक्कर में राहत कार्यो में बाधा उत्पन्न होगी। वी0वी0आई0पी0 के आने पर षासन को व्यवस्था करनी पड़ती है जो इस समय सम्भव नही है। होलीकप्टर से नेताओं की जगह वहाॅ पर फसे लोगों की मदद की जा सके और षासन प्रषासन को आपदा कार्य में दखल अंदाजी नही करनी चाहिए , इस समय सिर्फ उन लोगों को वहाॅ से सुरक्षित स्थान पर ले जाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना ही मिषन होना चाहिए सभी राजनितिक पार्टीयो एंव सहायता समूहो को उनकी मदद के लिए एकजुट होकर सरकार का साथ देना चाहिए ताकि मानव जाति की इतनी ब-सजय़ी त्रासदी से बचाया जा सके, लापता लोगों की भी जल्दी से जल्दी -सजयूं-सजय होनी चाहिए लोगों को धैर्य से काम लेना चाहिए ताकि बचाव कार्यो में विलम्ब न हो। दूर संचार व्यवस्था को जल्दी से जल्दी से ठीक करना होगा, जिससे वहाॅ दूर-ंउचयदराज फसे लोग सरकार एंव अपने घर वालो तक कुषलछेप भेज सके, तथा उनके फंसे होने की जानकारी मिल जाएॅं


राहत कार्य वहाॅ कि स्थानीय जनता का हाल-ंउचयचाल भी पूछना चाहिए क्योंकि उन लोगों ने घर बार के साथ अपना सब कुछ खो चुके है। उनकी की ओर भी सरकार का ध्यान जाना चाहिए, इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रषंसा करनी होगी कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीणो का पूर्नवास के लिए उन्होंने जो घोशणा कि है उसको अमलेजामा पहनाए जाए ताकि वह मात्र घोशणा बनकर न रह जाय


दुर्गेष रणाकोटी
देहरादून (उत्तराखण्ड)

22 जून 2013 


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