Thursday, January 9, 2014

Live in relationship


लिव इन रिलेशनशिप 

लिव इन रिलेशनशिप  को कानून का दर्जा मिलने वाला है, लेकिन इसको कानून का दर्जा मिलने से पहले इसके कुछ पहलुओं पर जरूर विचार विमर्श  होना चाहिए। समाज एंव रूढि़वादी मानसिकता के लोग इस पर जरूर बबाल मचाऐगें पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है। किसी की आर्थिक आजादी पर किसी भी व्यक्ति का कोई हस्तकक्षेप नही होना चाहिए सभी को अपने जीवन को जीने का हक है वह किस तरह जिता है इस पर किसी भी इंसान को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए। हर आदमी को जीने को हक है वह किस तरह जिता इस पर सिर्फ और सिर्फ मात्र उसका हक है।

लिव इन रिलेशनशिप  में रहने वाले स्त्री-पुरूश कानून के दायरे में आने चाहिए, ताकि महिलाओं के अधिकरो का शोषण न हो, इनका पंजीकरण होना चाहिए क्योंकि महानगरो में लिव इन रिलेषनषीप का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है। और इससे तलाक के मामलो में भी वृद्धि हो रही है, इसिलिए राश्ट्रीय महिला आयोग की राय है कि ऐसी महिलाओं को गुजारे भत्ते का पूरा हक मिलना चाहिए, और ऐसे संबधो से पैदा हुए बच्चों को पिता की संपत्ति पर पूरा हक मिलना चाहिए।

संविधान निर्माण के समय लिव इन रिलेशनशिप के बारे में किसी ने सोचा भी नही होगा लेकिन समय के बदलने के कारण स्त्री-पुरूश भागदौड़ की जिंदगी एंव कैरियर के कारण  षादी ब्याह के झमेलो से बचने के लिए लिव इन रिलेशनशिप मे रहना पंसद कर रहे हैं। इसलिए इसको कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए।लिव इन रिलेशनशिप  के परिपेक्ष सुप्रीम कोर्ट ने संसद से यह कहा है कि वह घरेलू हिंसा अधिनियम में ऐसी तब्दीलियां करे जिससे लिव इन रिलेशनशिप  में बधी महिलाओं और उनके बच्चों को भी उसके तहत सुरक्षा मिल सके।

एक निष्चित समय से ज्याद समय तक एक साथ रहने वाले स्त्री-पुरूश के   को कानूनी मान्यता मिल सके ताकि उन से उत्पन्न संतान को कानूनी अधिकार मिल सके।

सुप्रिम कोर्ट ने भा0दड संहिता की धारा-377 को संवैधानिकता बरकरार रखते हुए कहा कि एंकात स्थान पर दो पुरूश या दो महिलायें के बीच बनाया गया यौन संबधं इस धारा के तहत दंडनीय अपराध है।  इसमें अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। यह कानून 150 साल पुराना है। इसमें  परिवर्तन होना चाहिये 

दुर्गेश रणाकोटी 
देहरादून, उत्तराखंड 

1 comment:

  1. Dear sir your Artical Live in Relationship is good unko kanoon ka darja milna chahiye

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