Monday, October 26, 2015

सर्वोच्च न्यायालय ने आधार कार्ड का बढ़ाया दायरा




सर्वोच्च न्यायालय ने आधार कार्ड का दायरा बढ़ा दिया है, अब इसका इस्तेमाल पीएफ, पेंशन स्कीमों, प्रधानमंत्री जनधन योजना और मनरेगा के लिए भी किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केन्द्र सरकार को इसकी इजाजत दे दी। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला सरकार के लिए बेहद राहत भरा है।

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पाॅंच सदस्यीय पीठ ने 11 अगस्त 2015 को दिए अपने उस अंतरिम आदेश में बदलाव कर दिया है, जिसमें उन्होंने सिर्फ एलपीजी और जन वितरण प्रणाली के लिए आधार के इस्तेमाल की इजाजत दी गई थी। पीठ ने सरकार को 23 सितम्बर 2013 के उस आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है, जिसमें कहा गया था कि ऐसे व्यक्ति को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से महरूम नहीं रखा जा सकता है, जिसके पास आधार न हो। 

पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब तक आधार की संवैधानिक वैधता को लेकर बड़ी का निर्णय नहीं आ जाता तब तक आधार पूरी तरह से स्वैच्छिक रहेगा। मालूम हो कि रिजर्व बैंक आॅफ इडि़या, यूआईडीआईए, सेबी, ट्राई सहित कई अन्य आथाॅरिटी ने याचिका दायर कर 11 अगस्त के अंतरिम आदेश में बदलाव करने की गुहार की थी। इन आथाॅरिटी का कहना था कि इस अंतरिम आदेश के कारण सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लोगों तक पहुचांने में परेशानी आ रही है।

बृहस्पतिवार को सनुवाई के दौरान आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायधीश के एस पुटटास्वामी की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने आधार के दायरे को बढ़ाने वाली याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया। इस पर पीठ ने दीवान से पूछा कि आपका यह कहना है कि आधार कार्ड के लिए बायोमैट्रिक्स डाटा लिया गया है। इसका दुरूपयोग हो सकता है।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
26 October, 2015

Wednesday, September 23, 2015

आखिर कब तक वौट बैंक के लिए आरक्षण दिया जायेगा।



सामाजिक-आर्थिक बराबरी का लक्ष्य हासिल करने के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की गई थी  और 65 साल के अन्तराल भी  आरक्षण की व्यवस्था जस की तस बनी हुइ्र है। आर एस एस प्रमुख मोहन राव भागवत ने जिस अधिकार के साथ आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने का सुझाव दे डाला है वह बिल्कुल सही है। अब उनके साथ शिव सेना ने भी यही बात कही है। आरक्षण से राजनितिक पार्टीया अपनी सत्ता बचाये रखना चाहती है

बिहार में आरक्षण के उपर हो रही राजनीती से यह साबित हो गया कि हमारे देश का सिस्टम कितना लचर है। हर कोइ पाटी्र आरक्षण के पक्ष में हैं। आरक्षण से हो रहे नुकसान को कोइ्र पाटी देखना नही चाहती है। सरकारी नौकरी पाने का सबसे आसान तरीका है आरक्षण।

एक तरफ देश में हर साल बेरोजगारों की संख्या बढती जा रही है। दूसरी तरफ राजनितिक पाटी्रया अपना उल्लू सीधा करने में लगी हुइ है। 

एक के बाद एक जातीयाॅ देश में आरक्षण का लाभ लेना चाहेंगे। पहले गुज्ररो ने आरक्षण के लिए माॅग उठाइ्र और गुजरात में पटेल  समुदाय ने भी माॅग उठाइ है और धीरे धीरे देश मे और जातियाॅ भी इसके लिए आन्दोलन करेगी। आरक्षण से नौकरी पाने का सबसे सरल तरीका है, आरक्षण  की आड मे आज हर राजनिति पार्टीया अपना उल्लू सीधा करते रहते है और समय समय पर वोट बैंक की राजनीति के कारण आज आरक्षण जस का तस बना हुआ है।

एक समय ऐसा आयेगा जब सवण्र तबके के लोगों आरक्षण के लिए आवाज उठाना शुरू कर देगे। समय रहते अगर आरक्षण जैसे सवेदनाशील मसले पर सरकार चेती नही तो उन दिन दूर नही है जब आरक्षण के लिए खूनी खेल शुरू हो जायेगा।

केन्द्र एंव राज्य सरकारों को नौकरीयों में आरक्षण खत्म कर देना चाहिए। आरक्षण सिफ्र पढाइ्र में देना चाहिए और उन परिवारो ंको सरकार को आथिक्र सहायता देनी चाहिए। जिससे गरीब एंव पिछडें तबके के लोगों को शिक्षित  बनाया जाए ताकि वे अपने पैरों पर खडे हो सके 

आज लगभग हर सरकार एंव राजनितिक पाटी्रयों की आरक्षण के उपर दो राय है एक तकबा चाहता है कि आरक्षण मिले और दूसरा चाहता है कि आरक्षण खत्म होना चाहिए लेकिन सरकारे वोट बैक के कारण इस आरक्षण रूपी तुरूप के इके को खोना नही चाहते है।

आरक्षण को जातीय आधार पर देना चाहिए एंव उन जातियों की मिलना चाहिए जो आज भी विकसित नही हो पाये है। जिनका विकास अभी तक नही हो पाया है।

आर0एस0एस0 प्रमुख मोहन का बयान राजनिति प्रेरित नही इसलिए उन्होने आरक्षण के उपर अपनी सही राय दी ताकि देश में किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न हो सेके ।

खासतौर अल्पसख्यको की हिमायती एंव राज्य स्तरीय पाटी्रया आरक्षण के पक्ष में है, आरक्षण से क्षेचीय पाटी्रया अपनी राजनितिक रोटीया सेकते है 



Durgesh Ranakoti
Dehradun Uttarakhand
24 Sep. 2015

Friday, June 12, 2015

पूरे विश्व में हर दूसरा आदमी किसी न किसी बिमारी से ग्रसित क्यों है ?



आज आधुनिक युग में पूरे विश्व में देखे तो आम हो या खास आदमी खान-पान के कारण एंव अनिमियत जीवन शैली के कारण वह किसी न किसी बीमारी का शिकार होता जा रहा है पूरी दुनिया में लगभग 60 से 70 प्रतिशत लोंग मधुमेह जैसी बिमारी से ग्रसित है। इसके बाद अर्थ राइटीस, ब्लड प्रेसर, हार्ट अटेक, मोटापे, डिप्रेशन, वीपी0, आदि के शिकार होते जा रहे हैं। जबकि हम लोग लगातार चाहे वह चिकित्सा विज्ञान हो या तकनीकी विज्ञान हम नये-नये शोध करते आ रहे हैं। लेकिन ये पता नहीं लगा पा रहे है कि पूरे विश्व में हर दूसरा आदमी किसी न किसी बिमारी से ग्रसित क्यों है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार खान-पान एंव अनियमित जीवन शैली के कारण माना जा रहा है। लेकिन जरा सोचों कि 60 से 70 के दशक में भी इतने लोग बिमार थे। अब विचारणीय प्रशन यह है कि जो हम लोग खा रहे हैं वह कितना शुद्व एंव पौष्टिक है, उसमें कितनी मिलावट है। जनसंख्या के बढने के साथ-साथ भोजन की माॅंग एंव खपत भी बढती गई, लेकिन पैदावर भी बढनी चाहिए, किसानों ने मुनाफे एंव पैदावार बढाने के लिए नई तकनीको के इस्तेमाल के साथ-साथ रासायनिक खादों का प्रयोग जमकर किया जाता है, इससे पैदावर तो बढेगी ही, और मुनाफा भी कमाया जायेगा। लेकिन इससे आम आदमी के स्वास्थ्य पर विपरित असर पडता जा रहा है। रासायानिक खादों के अत्याधिक इस्तेमाल से हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडा है, जिस कारण पूरे विश्व में हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी बिमारी से ग्रसित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस बारे में जरूर सोचना चाहिए कि परम्परागत खेती को बढावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें जिससे हम लोगों के जीवन पर खान-पान पर बूरा असर न पडे। आधुनिक जीवनशैली के कारण हम लोगों की प्रति जैविक क्षमता कम होती जा रही है। जिस कारण लगातार बिमारीया बढती जा रही है। आज से 50 या 60 साल पहले इन बिमारीयों से बहुत कम लोग प्रभावित थे, क्योंकि उस दौरान पूरे विश्व में तकनीक का इस्तेमाल इतना नहीं था और श्रम शक्ति के ऊपर आत्म निर्भरता अधिक थी, और रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम मात्रा में होता था। इसलिए पूरे विश्व में बिमारीयों से लोग इतनी संख्या में ग्रसित नहीं थे।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
12 June, 2015

Sunday, June 7, 2015

फ्रेच ओपन 2015



सरेना विलियमस ने जीता 20वाॅं ग्रैंड स्लैम  खिताब 

सरेना विलियम ने 06 जून 2015 को अपना 20वाॅं ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम कर लिया । अमेरिका की सरेना विलियम ने फाइनल मैच में चेक गणराज्य की नवोदित लूसी सफरोवा को रोमाचक मुकाबले में 6-3, 6-7, 6-2 से मात देकर सर्वाधिक ग्रैंड स्लैम  जीतने के रिकार्ड के लिए दो कदम दूर है। 33 वर्षीय सरेना के कैरियर का यह 24वाॅ फाइनल मुकाबला था, जिसमें उन्होंने जीत हासिल की।
इससे पहले स्टेफी ग्राफ ने 22 ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम कर रखे हैं। इसके साथ ही इस साल सेरेना विलियम्स ने चारों गैंड स्लेम खिताब अपने नाम कर दिया। इससे पहले चारो ग्रैंड स्लेम खिताब तीन महिला खिलाडीयों ने अपना नाम किया । अतिंम बार यह खिताब 1988 में स्टेफी ग्राफ ने अपना नाम कर दिया था। दुनिया की नम्बर एक खिलाडी सरेना विलियम ने फ्रेच ओपन जीतकर 20वाॅ ग्रैड स्लेम अपने नाम किया। इस जीत के साथ सरेना टेनिस इतिहास में आस्टेªलिया की मार्गरेट कोर्ट 24 ग्रैंड स्लैम खिताब, स्टेफी ग्राफ ने 22 ग्रैंड स्लैम खिताब के बाद तीसरे स्थान पर पहुॅच गयी है। 

Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
07 June, 2015

Saturday, June 6, 2015


उत्तराखण्ड आपदा घोटाला 

उत्तराखण्ड आपदा घोटाला अब सरकार के लिए गले की फास बनता जा रहा है सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत हुए खुलासे से यह बात साबित हो गयी की किसी तरह देश के पैसे को बर्बाद किया गया है। सरकारी अफसरो ने करोड़ों रूपये डकार दिये। आपदा घोटाले को जिस तरह सूचना आयुक्त नौटियाल ने घोटाले का पर्दाफास किया है, और यह जाहिर कराया कि देश एंव राज्यो में जिस तरह से भ्रष्टाचार ने अपने जड़े जमायी हुई हैं, वह एक विचारणीय प्रशन है। अब यह बात सामने आती है कि जब अफसरों ने इतने पैसे का घोटाला किया तो नेताओं ने किस कदर लूट मचायी होगी। तत्कालीन बहुगुणा सरकार को इसी कारण हटाया गया था । निर्वतमान मुख्यमंत्री हरीश रावत जी एंव पूरी काॅग्रेस के निशाने पर इस समय सूचना आयुक्त हैं। जिस सूचना आयुक्त इन इतने बडे़ घोटाले से पर्दाफाश करवाया आज वह उत्तराखण्ड सरकार की आॅखों में किरकीरी बना हुआ है। जिस तरह मुख्यमंत्री हरीश रावत आपदा पुनर्वास एंव केदारनाथ को फिर से खड़ा करने के लाख दावे कर लें, लेकिन हकिकत कुछ और नजर आ रही है। मझे हुए राजनितिक हरीश रावत जी से इस बार आपदा घोटाले को लेकर जिस तरह रूख अपनाया वह कुछ ही और संकेत करता है। जिस तरह मुख्यमंत्री हरीश रावत अभी तक के कार्यकाल से यही लग रहा था कि वो प्रदेश को सही दिशा पे लेकर जायेगें, लेकिन अब वो भटकते नजर आ रहे हैं। जिस तरह से काॅग्रेस इस पूरे मामले की लिपा-पोती कर रही है वह शर्मनाक है। 



Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
06 June, 2015

Sunday, April 12, 2015

भाजपा के 35 सालों के इतिहास में पहली बार


भाजपा के 35 साल का इतिहास

भाजपा की स्थापना 1980 में हुई, तीन दशक तक पार्टी अटल-आड़वाणी के इर्द गिर्द घुमती नजर आयी। भाजपा के इन 35 सालों के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि मंच पर माननीय आडवाणी जी बैठे हो और उन्होंने पार्टी को सम्बोधित न किया हो। भाजपा के संस्थापक सदस्यो अटल-आडवाणी की यह पार्टी में आज आड़वाणी जी की कोई जगह नही हैं। आडवाणी जी जैसा कदावर नेता आज मात्र मूकदर्शक बन  बैठा है। वक्त का फेर कहें या समय बड़ा बलवान है जैसे कहावते चरितार्थ हो रही हैं, प्रधानमंत्री पद का सबसे सुयोग्य नेता या बिड़बना कहें या फिर आडवाणी जी की उम्र। इन 35 सालों के पार्टी इतिहास में आड़वाणी जी पार्टी के आगे मूकदर्शक बने हुए है। एक समय था कि पार्टी में उनकी तूती बोलती थी। आडवाणी जी बेदाग छवि वाले नेता रहे हंै। पार्टी के अन्दर उनका बहुत सम्मान था । वक्त का ही फेर कहें कि नरेन्द्र मोदी का कद आज आडवाणी जी ऊपर हो गया और आज अपने बूजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है। इतिहास साक्ष्यी रहा है जब जब ऐसा हुआ है तब तब पार्टीयों में खलबली मची है। आज आड़वाणी हैं तो कल मोदी भी होंगे, इतिहास खुद को दोहराता है, और अगले पाॅच या दस साल मोदी कि भी यही दशा होगी जबकि पार्टी को इन नेताओं के लम्बे राजनितिक अनुभवों का फायदा लेना चाहिए था। पार्टी अपने संस्थापक सदस्यों मुरली मनोहर एंव आडवाणी जी जैसे नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है, जिन्होंने आजीवन पार्टी को अपने खून पशीने से यहाॅ तक पहुॅचाया, आज उनके साथ इस तरह का सलूक किया जा रहा। संस्कारो वाली यह पार्टी आज अपने संस्थापक सदस्यो के साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है, कहाॅ गये वे लाॅखो करोड़ो सदस्य जो ये सब देखकर मूकदर्शक बने हुए है, विश्व की सबसे बड़ी सदस्यों वाली पार्टी में अपने बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर दिया है, और साथ-साथ आर0एस0एस0 भी मुकदर्शक बनकर बैठा है। काॅग्रेस को संस्कार का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा आज खुद अपने बुर्जुग नेताओं का अपमान कर रही है। सत्ता मिलते ही पार्टी ने सबकुछ भूल चुके है, कि अटल-आड़वाणी जी का ही अथक प्रयास से आज पार्टी यहाॅ खड़ी है। आड़वाणी जी की सोमनाथ यात्रा से ही भाजपा का सत्ता की और यह रास्ता खुला था। आड़वाणी जी ने ही गुजरात में केशुभाई पटेल को हटाकर नरेन्द्र मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनावाया। आड़वाणी जी की छत्रछाया के कारण ही वे गुजरात दंगो के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहे। आज समय का खेल देखो की मोदी जी की सरकार में उनके ही सबसे वरिष्ठ एंव संस्थापक सदस्य का इस तरह अपमान हो रहा है। कल तक सर्वसम्मत पार्टी आज काॅगे्रस की राह पर चल रही है। काॅग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी समस्या रही है, वन मैन पार्टी, लेकिन आज भाजपा भी वन मैन दिख रही है। आज पूरी पार्टी मोदी के आगे पिछे घुम रही है। अटल-आडवाणी युग में फैसले मिल-जुल कर लिये जाते थे, लेकिन आज हर फैसला मोदी जी ही ले रहे है। सर्वसम्मत भाजपा आज वन मैन पार्टी बन गयी है। आम आदमी को हमेशा से काॅग्रेस का यही चरित्र ना गॅवारा था वन मैन पार्टी, लेकिन भाजपा भी आज उसी राह पर खड़ी हैं।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
12 April, 2015

एक मई 2015, से रोमिंग काल दरें हुई सस्ती



एक मई 2015,  से रोमिंग काल दरें हुई सस्ती

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सभी टेलीकाॅम सर्विस कंपनियों को अपनी दरों में बदलाव करने के लिए कहा है। ट्राई की तरफ से जारी दरों के मुताबिक अब कोई भी टेलीकाॅम कम्पनी अपने सर्किल में रोमिंग में रहने के दौरान काॅल करने पर 80 पैसे प्रति मिनट से अधिक का चार्ज नहीं कर सकती है। अभी रोमिंग में रहने पर काॅल करने पर कॅपनी एक रू0 प्रति मिनट तक चार्ज कर सकती है। टेलीकाॅम सर्विस एरिया में बदलाव होने पर लम्बी दूरी की रोमिंग काॅल पर एक मई से अधिकतम 1.15 रूपये प्रति मिनट का शुल्क लिया जा सकता है। फिलहाल यह शुल्क अधिकतम 1.50 रूपये प्रति मिनट का है। रोमिंग के दौरान फोन सुनने (इनकमिंग काॅल) के बदले टेलीकाॅम कंपनियां अगामी एक मई से अधिकतम 45 पैसे प्रति मिनट का शुल्क ले सकती है। वर्तमान में यह दर अधिकतम 75 पैसे प्रति मिनट है।



Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
12 April, 2015

Tuesday, April 7, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

केन्द्र सरकार ने औद्योगिकरण एंव विकास के लिए अनिवार्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास और नगरीकरण के लिए भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित परिवार एंव कुटंबों को कम से कम बाधा पॅहुचाए बिना भूमि अर्जन हेतु ‘‘ भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापना में उचित, प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 अधिसूचित किया है, जिसने भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 का स्थान लिया। यह अधिनियम 01 जनवरी, 2014 से प्रभावी हुआ है, परन्तु इस अधिनियम के कार्यान्वयन में बहुत सी कठिनाईया सामने आ रही हैं जिन्हें दूर करने हेतु सरकार इस अधिनियम में कुछ संशोधनों को वर्ष 2015 में मंजूरी प्रदान की है। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी प्रदान करते समय देश की सामरिक एंव विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ किसानों के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है।

इस अधिनियम की मुख्य बातें जो निम्न हैं

भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2015 को ग्रामीण विकास मंत्री चो0 बिरेंदर सिंह द्वारा 24 फरवरी, 2015 को लोकसभा में पेश किया गया। 

इस विधेयक द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रस्ताव है। 10 मार्च, 2015 को यह विधेयक लोक सभा द्वारा पारित कर दिया गया।

इस विधेयक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में जो संशोधन प्रस्तावित हैं, उनमें प्रमुख हैं:- 

13 कानूनों (राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 तथा रेलवे अधिनियम,1989) को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के दायरे से बाहर रखा गया था। हांलाकि अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर (अर्थात 01 जनवरी 2015 तक) इन 13 कानूनों के प्रतिकर, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन सम्बन्धी प्रावधानों को अधिनियम (लारक एक्ट, 2013) के तालमेल में लाने की आवश्यकता व्यक्त की गई थी। लोकसभा द्वारा पारित विधेयक में इस सम्बन्ध में संशोधन प्रस्तावित है।

इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि निजि परियोजनाओं हेतु भूमि अधिग्रहण के लिए 80 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति आवश्यक होगी। जबकि सार्वजनिक-निजि भागीदारी (पी0पी0पी0) वाली परियोजनाओं हेतु 70 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति प्राप्त करने को आवश्यक माना गया है। लोकसभा द्वारा पारित नये संशोधन विधेयक में भूमि प्रयोग पाॅच श्रेणियों को अधिनियम के इस प्रावधान से छूट प्रदान करना प्रस्तावित है जो निम्न हैं:-
(1) रक्षा (2) ग्रामीण अवसंरचना (3) वहनीय आवास (4) औद्योगिक काॅरिडोर, तथा (5) सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं सहित ऐसी अवसंरचना परियोजनाएं जिनमें केंन्द्र सरकार भू-स्वामी हो। 
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी अस्पतालों तथा निजी शैक्षिक संस्थानों हेतु भूमि अर्जन को अपने दायरे से बाहर रखा गया है जबकि संशोधन विधेयक में इस प्रतिबंध को समाप्त किया जाना प्रस्तावित है।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी कंपनियों हेतु भूमि अर्जन पर प्रभावी है, हाॅलाकि संशोधन विधेयक में निजी कम्पनियों (प्राइवेट कम्पनी) पद को निजी संस्थाओं पद से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित है। सरकारी संस्थाओं के अतिरिक्त कोई भी संस्था निजी संस्था की श्रेणी में आएगी और इसमें प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप, कम्पनी, काॅरपोरेशन, गैर-सरकारी संगठन या किसी अन्य कानून के अन्तर्गत कोई अन्य संस्था शामिल होगी।


Durgesh Ranakoti, 
Dehradun, Uttarakhand
07 April, 2015

डिजिटल इंडि़या परियोजना



                                     डिजिटल इंडि़या परियोजना 

केरल का इदुक्की देश का पहला ब्राॅडबैंड जिला बना। संचार एंव सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केरल के इदुक्की जिले में 12 जनवरी 2015 को डिजिटल इंडि़या कार्यक्रम के तहत आयोजित एक समारोह में भारत के पहले हाई स्पीड रूरल ब्राॅडबैंड नेटवर्क का शुभारभं किया। नेशनल आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) के आरम्भ के साथ ही केरल का इदुक्की भारत का पहला ऐसा जिला बन गया है जिसके सभी क्षेत्र हाई स्पीड ब्राॅडबैंड से जुड़ गये है। वर्तमान समय में इस जिले में आठ ब्लाॅक कार्यालय और 52 ग्राम पंचायतों को आॅप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है और एक ग्राम पंचायत को वीसैट के जरिये जोड़ा गया है। डिजिटल इंडि़या पोग्राम केन्द्र सरकार की महत्वकाक्षी योजना है। जिसका लक्ष्य भारत को डिजिटली समर्थ समाज एंव ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करना है। प्रत्येक नागरिक को ब्राॅडबैंड़ कनेक्टिीवीटी उपलब्ध कराना डिजिटल इंजिया के प्रमुख उद्वेश्य है। एनओएफएन दुनिया में अपने तरह की विशालतम ग्रामीण कनेक्टिीविटी परियोजना है। यह ब्राॅडबैंड आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क के माध्यम से भारत के 2.5 लाख पंचायाते को जोड़ा जायेगा। यह परियोजना प्रथम चरण में तीन केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों बीएसएनएलए, पीजीसीआईएल और रेलटेल के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
07 April.2015