Sunday, April 12, 2015

भाजपा के 35 सालों के इतिहास में पहली बार


भाजपा के 35 साल का इतिहास

भाजपा की स्थापना 1980 में हुई, तीन दशक तक पार्टी अटल-आड़वाणी के इर्द गिर्द घुमती नजर आयी। भाजपा के इन 35 सालों के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि मंच पर माननीय आडवाणी जी बैठे हो और उन्होंने पार्टी को सम्बोधित न किया हो। भाजपा के संस्थापक सदस्यो अटल-आडवाणी की यह पार्टी में आज आड़वाणी जी की कोई जगह नही हैं। आडवाणी जी जैसा कदावर नेता आज मात्र मूकदर्शक बन  बैठा है। वक्त का फेर कहें या समय बड़ा बलवान है जैसे कहावते चरितार्थ हो रही हैं, प्रधानमंत्री पद का सबसे सुयोग्य नेता या बिड़बना कहें या फिर आडवाणी जी की उम्र। इन 35 सालों के पार्टी इतिहास में आड़वाणी जी पार्टी के आगे मूकदर्शक बने हुए है। एक समय था कि पार्टी में उनकी तूती बोलती थी। आडवाणी जी बेदाग छवि वाले नेता रहे हंै। पार्टी के अन्दर उनका बहुत सम्मान था । वक्त का ही फेर कहें कि नरेन्द्र मोदी का कद आज आडवाणी जी ऊपर हो गया और आज अपने बूजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है। इतिहास साक्ष्यी रहा है जब जब ऐसा हुआ है तब तब पार्टीयों में खलबली मची है। आज आड़वाणी हैं तो कल मोदी भी होंगे, इतिहास खुद को दोहराता है, और अगले पाॅच या दस साल मोदी कि भी यही दशा होगी जबकि पार्टी को इन नेताओं के लम्बे राजनितिक अनुभवों का फायदा लेना चाहिए था। पार्टी अपने संस्थापक सदस्यों मुरली मनोहर एंव आडवाणी जी जैसे नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है, जिन्होंने आजीवन पार्टी को अपने खून पशीने से यहाॅ तक पहुॅचाया, आज उनके साथ इस तरह का सलूक किया जा रहा। संस्कारो वाली यह पार्टी आज अपने संस्थापक सदस्यो के साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है, कहाॅ गये वे लाॅखो करोड़ो सदस्य जो ये सब देखकर मूकदर्शक बने हुए है, विश्व की सबसे बड़ी सदस्यों वाली पार्टी में अपने बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर दिया है, और साथ-साथ आर0एस0एस0 भी मुकदर्शक बनकर बैठा है। काॅग्रेस को संस्कार का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा आज खुद अपने बुर्जुग नेताओं का अपमान कर रही है। सत्ता मिलते ही पार्टी ने सबकुछ भूल चुके है, कि अटल-आड़वाणी जी का ही अथक प्रयास से आज पार्टी यहाॅ खड़ी है। आड़वाणी जी की सोमनाथ यात्रा से ही भाजपा का सत्ता की और यह रास्ता खुला था। आड़वाणी जी ने ही गुजरात में केशुभाई पटेल को हटाकर नरेन्द्र मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनावाया। आड़वाणी जी की छत्रछाया के कारण ही वे गुजरात दंगो के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहे। आज समय का खेल देखो की मोदी जी की सरकार में उनके ही सबसे वरिष्ठ एंव संस्थापक सदस्य का इस तरह अपमान हो रहा है। कल तक सर्वसम्मत पार्टी आज काॅगे्रस की राह पर चल रही है। काॅग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी समस्या रही है, वन मैन पार्टी, लेकिन आज भाजपा भी वन मैन दिख रही है। आज पूरी पार्टी मोदी के आगे पिछे घुम रही है। अटल-आडवाणी युग में फैसले मिल-जुल कर लिये जाते थे, लेकिन आज हर फैसला मोदी जी ही ले रहे है। सर्वसम्मत भाजपा आज वन मैन पार्टी बन गयी है। आम आदमी को हमेशा से काॅग्रेस का यही चरित्र ना गॅवारा था वन मैन पार्टी, लेकिन भाजपा भी आज उसी राह पर खड़ी हैं।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
12 April, 2015

एक मई 2015, से रोमिंग काल दरें हुई सस्ती



एक मई 2015,  से रोमिंग काल दरें हुई सस्ती

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सभी टेलीकाॅम सर्विस कंपनियों को अपनी दरों में बदलाव करने के लिए कहा है। ट्राई की तरफ से जारी दरों के मुताबिक अब कोई भी टेलीकाॅम कम्पनी अपने सर्किल में रोमिंग में रहने के दौरान काॅल करने पर 80 पैसे प्रति मिनट से अधिक का चार्ज नहीं कर सकती है। अभी रोमिंग में रहने पर काॅल करने पर कॅपनी एक रू0 प्रति मिनट तक चार्ज कर सकती है। टेलीकाॅम सर्विस एरिया में बदलाव होने पर लम्बी दूरी की रोमिंग काॅल पर एक मई से अधिकतम 1.15 रूपये प्रति मिनट का शुल्क लिया जा सकता है। फिलहाल यह शुल्क अधिकतम 1.50 रूपये प्रति मिनट का है। रोमिंग के दौरान फोन सुनने (इनकमिंग काॅल) के बदले टेलीकाॅम कंपनियां अगामी एक मई से अधिकतम 45 पैसे प्रति मिनट का शुल्क ले सकती है। वर्तमान में यह दर अधिकतम 75 पैसे प्रति मिनट है।



Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
12 April, 2015

Tuesday, April 7, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

केन्द्र सरकार ने औद्योगिकरण एंव विकास के लिए अनिवार्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास और नगरीकरण के लिए भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित परिवार एंव कुटंबों को कम से कम बाधा पॅहुचाए बिना भूमि अर्जन हेतु ‘‘ भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापना में उचित, प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 अधिसूचित किया है, जिसने भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 का स्थान लिया। यह अधिनियम 01 जनवरी, 2014 से प्रभावी हुआ है, परन्तु इस अधिनियम के कार्यान्वयन में बहुत सी कठिनाईया सामने आ रही हैं जिन्हें दूर करने हेतु सरकार इस अधिनियम में कुछ संशोधनों को वर्ष 2015 में मंजूरी प्रदान की है। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी प्रदान करते समय देश की सामरिक एंव विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ किसानों के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है।

इस अधिनियम की मुख्य बातें जो निम्न हैं

भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2015 को ग्रामीण विकास मंत्री चो0 बिरेंदर सिंह द्वारा 24 फरवरी, 2015 को लोकसभा में पेश किया गया। 

इस विधेयक द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रस्ताव है। 10 मार्च, 2015 को यह विधेयक लोक सभा द्वारा पारित कर दिया गया।

इस विधेयक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में जो संशोधन प्रस्तावित हैं, उनमें प्रमुख हैं:- 

13 कानूनों (राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 तथा रेलवे अधिनियम,1989) को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के दायरे से बाहर रखा गया था। हांलाकि अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर (अर्थात 01 जनवरी 2015 तक) इन 13 कानूनों के प्रतिकर, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन सम्बन्धी प्रावधानों को अधिनियम (लारक एक्ट, 2013) के तालमेल में लाने की आवश्यकता व्यक्त की गई थी। लोकसभा द्वारा पारित विधेयक में इस सम्बन्ध में संशोधन प्रस्तावित है।

इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि निजि परियोजनाओं हेतु भूमि अधिग्रहण के लिए 80 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति आवश्यक होगी। जबकि सार्वजनिक-निजि भागीदारी (पी0पी0पी0) वाली परियोजनाओं हेतु 70 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति प्राप्त करने को आवश्यक माना गया है। लोकसभा द्वारा पारित नये संशोधन विधेयक में भूमि प्रयोग पाॅच श्रेणियों को अधिनियम के इस प्रावधान से छूट प्रदान करना प्रस्तावित है जो निम्न हैं:-
(1) रक्षा (2) ग्रामीण अवसंरचना (3) वहनीय आवास (4) औद्योगिक काॅरिडोर, तथा (5) सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं सहित ऐसी अवसंरचना परियोजनाएं जिनमें केंन्द्र सरकार भू-स्वामी हो। 
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी अस्पतालों तथा निजी शैक्षिक संस्थानों हेतु भूमि अर्जन को अपने दायरे से बाहर रखा गया है जबकि संशोधन विधेयक में इस प्रतिबंध को समाप्त किया जाना प्रस्तावित है।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी कंपनियों हेतु भूमि अर्जन पर प्रभावी है, हाॅलाकि संशोधन विधेयक में निजी कम्पनियों (प्राइवेट कम्पनी) पद को निजी संस्थाओं पद से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित है। सरकारी संस्थाओं के अतिरिक्त कोई भी संस्था निजी संस्था की श्रेणी में आएगी और इसमें प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप, कम्पनी, काॅरपोरेशन, गैर-सरकारी संगठन या किसी अन्य कानून के अन्तर्गत कोई अन्य संस्था शामिल होगी।


Durgesh Ranakoti, 
Dehradun, Uttarakhand
07 April, 2015

डिजिटल इंडि़या परियोजना



                                     डिजिटल इंडि़या परियोजना 

केरल का इदुक्की देश का पहला ब्राॅडबैंड जिला बना। संचार एंव सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केरल के इदुक्की जिले में 12 जनवरी 2015 को डिजिटल इंडि़या कार्यक्रम के तहत आयोजित एक समारोह में भारत के पहले हाई स्पीड रूरल ब्राॅडबैंड नेटवर्क का शुभारभं किया। नेशनल आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) के आरम्भ के साथ ही केरल का इदुक्की भारत का पहला ऐसा जिला बन गया है जिसके सभी क्षेत्र हाई स्पीड ब्राॅडबैंड से जुड़ गये है। वर्तमान समय में इस जिले में आठ ब्लाॅक कार्यालय और 52 ग्राम पंचायतों को आॅप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है और एक ग्राम पंचायत को वीसैट के जरिये जोड़ा गया है। डिजिटल इंडि़या पोग्राम केन्द्र सरकार की महत्वकाक्षी योजना है। जिसका लक्ष्य भारत को डिजिटली समर्थ समाज एंव ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करना है। प्रत्येक नागरिक को ब्राॅडबैंड़ कनेक्टिीवीटी उपलब्ध कराना डिजिटल इंजिया के प्रमुख उद्वेश्य है। एनओएफएन दुनिया में अपने तरह की विशालतम ग्रामीण कनेक्टिीविटी परियोजना है। यह ब्राॅडबैंड आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क के माध्यम से भारत के 2.5 लाख पंचायाते को जोड़ा जायेगा। यह परियोजना प्रथम चरण में तीन केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों बीएसएनएलए, पीजीसीआईएल और रेलटेल के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
07 April.2015