Tuesday, April 7, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक, 2015

केन्द्र सरकार ने औद्योगिकरण एंव विकास के लिए अनिवार्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास और नगरीकरण के लिए भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित परिवार एंव कुटंबों को कम से कम बाधा पॅहुचाए बिना भूमि अर्जन हेतु ‘‘ भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापना में उचित, प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 अधिसूचित किया है, जिसने भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 का स्थान लिया। यह अधिनियम 01 जनवरी, 2014 से प्रभावी हुआ है, परन्तु इस अधिनियम के कार्यान्वयन में बहुत सी कठिनाईया सामने आ रही हैं जिन्हें दूर करने हेतु सरकार इस अधिनियम में कुछ संशोधनों को वर्ष 2015 में मंजूरी प्रदान की है। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी प्रदान करते समय देश की सामरिक एंव विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ किसानों के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है।

इस अधिनियम की मुख्य बातें जो निम्न हैं

भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2015 को ग्रामीण विकास मंत्री चो0 बिरेंदर सिंह द्वारा 24 फरवरी, 2015 को लोकसभा में पेश किया गया। 

इस विधेयक द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रस्ताव है। 10 मार्च, 2015 को यह विधेयक लोक सभा द्वारा पारित कर दिया गया।

इस विधेयक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में जो संशोधन प्रस्तावित हैं, उनमें प्रमुख हैं:- 

13 कानूनों (राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 तथा रेलवे अधिनियम,1989) को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के दायरे से बाहर रखा गया था। हांलाकि अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर (अर्थात 01 जनवरी 2015 तक) इन 13 कानूनों के प्रतिकर, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन सम्बन्धी प्रावधानों को अधिनियम (लारक एक्ट, 2013) के तालमेल में लाने की आवश्यकता व्यक्त की गई थी। लोकसभा द्वारा पारित विधेयक में इस सम्बन्ध में संशोधन प्रस्तावित है।

इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि निजि परियोजनाओं हेतु भूमि अधिग्रहण के लिए 80 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति आवश्यक होगी। जबकि सार्वजनिक-निजि भागीदारी (पी0पी0पी0) वाली परियोजनाओं हेतु 70 प्रतिशत भू-स्वामियों की अनुमति प्राप्त करने को आवश्यक माना गया है। लोकसभा द्वारा पारित नये संशोधन विधेयक में भूमि प्रयोग पाॅच श्रेणियों को अधिनियम के इस प्रावधान से छूट प्रदान करना प्रस्तावित है जो निम्न हैं:-
(1) रक्षा (2) ग्रामीण अवसंरचना (3) वहनीय आवास (4) औद्योगिक काॅरिडोर, तथा (5) सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं सहित ऐसी अवसंरचना परियोजनाएं जिनमें केंन्द्र सरकार भू-स्वामी हो। 
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी अस्पतालों तथा निजी शैक्षिक संस्थानों हेतु भूमि अर्जन को अपने दायरे से बाहर रखा गया है जबकि संशोधन विधेयक में इस प्रतिबंध को समाप्त किया जाना प्रस्तावित है।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में निजी कंपनियों हेतु भूमि अर्जन पर प्रभावी है, हाॅलाकि संशोधन विधेयक में निजी कम्पनियों (प्राइवेट कम्पनी) पद को निजी संस्थाओं पद से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित है। सरकारी संस्थाओं के अतिरिक्त कोई भी संस्था निजी संस्था की श्रेणी में आएगी और इसमें प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप, कम्पनी, काॅरपोरेशन, गैर-सरकारी संगठन या किसी अन्य कानून के अन्तर्गत कोई अन्य संस्था शामिल होगी।


Durgesh Ranakoti, 
Dehradun, Uttarakhand
07 April, 2015

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