Sunday, July 31, 2016

19 घटें एंव 25 किमी0 लम्बे गुरूग्राम-दिल्ली जाम



19 घटें एंव 25 किमी0 लम्बे गुरूग्राम-दिल्ली जाम ने देश के विकास की पोल खोल दी। इसमें भारत सरकार एंव राज्यों सरकारों का भी दोष है कि स्थिति इतनी विकराल क्यों होने दी। साथ-साथ पुरे देश की परिवहन व्यवस्था पर सवालियाॅ निशान लगा दिया। 

19 घंटे लम्बे जाम के बाद देश में आरोप प्रत्यारोप का खेल शुरू हो जायेगा, विपक्ष सत्ता पक्ष की टाॅग खिंचना शुरू कर देगा। लेकिन इन खामियों को दूर करने के बारे सरकार ही नही बल्कि विपक्ष को भी सोचना चाहिए कि जब देश की राजधानी दिल्ली एंव गुरूग्राम में यह स्थिति है तो देश के बाकि हिस्सो यानि अन्य राज्यों में क्या हाल होगा।
19 घटें एंव 25 किमी0 लम्बे गुरूग्राम-दिल्ली जाम ने देश की परिवहन व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया कि देश में परिवहन एंव यातायात क्या व्यवस्था है। देश के सबसे समृद्व एंव विकसीत शहर की परिवहन व्यवस्था के ये हाल हैं। 

आज अत्याधुनिक तकनीकी के बावजूद हम विवश क्यों है। इसमें सबसे बड़े दोषी हम ही है, लेकिन हमसे बड़ी दोषी सरकार है कि सरकार को इन सब समस्यों से निपटने के लिए पहले से तैयारी होना चाहिए था।

बड़ते हुए ट्रैफिक की समुचित व्यवस्था का न होना, इतना टैªफिक कोई एक दिन में नही हुआ होगा। इसमें भी कई साल लगे होंगे। लेकिन हमार सिस्टम इन सब समस्याओं से निपटने के लिए तैयार नही रहता है। अगर पहले से चाक चैबन्ध रहते तो स्थिति नियन्त्रण में रहती। लेकिन सरकार तभी जागति है जब इस तरह की घटनायें हो जाती है और अब हर बार कि तरह इस बार भी कागजी खानापूर्ति होने के बाद स्थिति जस तस बनी रहेगी।


Durgesh Ranakoti
Dehradun, Uttarakhand
31 July, 2016

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